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Sad Shayari On Relatives उन भावनाओं को व्यक्त करती है जो हमें अक्सर अपने रिश्तेदारों से मिलती हैं। रिश्तेदार हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं, लेकिन कभी-कभी उनके व्यवहार या बातों से हमें गहरा दुख होता है। यह शायरी उन अनकही भावनाओं को शब्दों में पिरोती है, जब हमें अपनों से ही ठेस पहुँचती है। यह उन पलों को दर्शाती है जब उम्मीदें टूटती हैं और दिल में दर्द पनपता है। इस संग्रह में आपको ऐसी दिल छू लेने वाली शायरी मिलेगी जो आपको अपने जज़्बातों को समझने और व्यक्त करने में मदद करेगी। अहमद फ़राज़ जैसे महान शायरों ने भी रिश्तों की गहराइयों को अपनी कलम से छुआ है। यह शायरी आपको यह एहसास दिलाएगी कि आप अकेले नहीं हैं जो ऐसे अनुभवों से गुजर रहे हैं। यह संग्रह उन सभी दिल टूटे हुए लोगों के लिए है जो अपने रिश्तेदारों से मिली तकलीफों को व्यक्त करना चाहते हैं।
रिश्तेदारों की महफ़िल में, अक्सर तन्हाई मिलती है,
हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे, एक गहरी खाई मिलती है।
वो कहते हैं अपने हैं, पर साथ नहीं देते,
तकलीफ में कभी भी, मेरा हाथ नहीं देते।
ज़ख्म दिए हैं अपनों ने, गैरों से क्या शिकायत,
रिश्तेदारों की दुनिया में, बस यही है हकीकत।
दिल तोड़कर मेरा, वो मुस्कुराते हैं,
रिश्तेदार होकर भी, मुझे रुलाते हैं।
मतलब के रिश्ते हैं सारे, जब तक काम चलता है,
रिश्तेदारों का प्यार भी, बस दिखावा लगता है।
पीठ पीछे बातें करते हैं, सामने मीठे बोल,
रिश्तेदारों की फितरत, बड़ी अजीब है ये मोल।
जब जरूरत पड़ी मुझे, सबने मुंह फेर लिया,
रिश्तेदारों ने ही तो, मेरा दिल तोड़ दिया।
खुशियों में शरीक होते हैं, पर गम में गायब,
रिश्तेदारों की दुनिया में, सब अजीबोगरीब।
नसीहतें देते हैं ज़्यादा, साथ कम देते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, बस बातें ही करते हैं।
उनकी बातें तीर सी चुभती हैं, दिल में मेरे,
रिश्तेदारों की बातें, ज़ख्म देती हैं गहरे।
प्यार की उम्मीद थी जिनसे, उन्होंने ही ठुकराया,
रिश्तेदारों ने ही तो, मेरा दिल दुखाया।
रिश्तेदारों के बीच रहकर भी, अकेलापन महसूस होता है,
उनका साथ भी अब, बेगाना लगता है।
दिखावे की दुनिया में, सच्चे रिश्ते कहाँ,
रिश्तेदारों के बीच भी, अब सच्चाई कहाँ।
वो कहते हैं सब्र करो, पर दर्द नहीं समझते,
रिश्तेदार होकर भी, मेरे आंसू नहीं पोंछते।
हर बात पर टोकते हैं, हर कदम पर रोकते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मेरी खुशियाँ छीनते हैं।
उनके ताने और बातें, दिल को चीर जाती हैं,
रिश्तेदारों की बातें, अक्सर रुला जाती हैं।
जब उम्मीदें होती हैं, तो वो तोड़ जाते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, अकेला छोड़ जाते हैं।
रिश्तों की डोर कमज़ोर है, टूट जाती है,
रिश्तेदारों की बातों से, दिल घबराती है।
बदल जाते हैं रिश्ते, समय के साथ-साथ,
रिश्तेदारों का साथ भी, अब नहीं रहा खास।
झूठे दिलासे देते हैं, झूठी कसमें खाते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, सिर्फ़ धोखा देते हैं।
उनकी बातों में जहर है, उनके दिलों में स्वार्थ,
रिश्तेदारों से बेहतर, अकेला रहना है सार्थक।
जब से समझा है मैंने, रिश्तेदारों का सच,
तब से हर रिश्ता, लगता है बेमच।
उनके चेहरे पर हँसी है, पर दिल में जलन,
रिश्तेदारों की दुनिया में, बस यही है चलन।
रिश्तेदारों की महफ़िल में, मेरा दम घुटता है,
सच्चा प्यार ढूँढने में, दिल भटकता है।
अब तो आदत हो गई है, अकेले रहने की,
रिश्तेदारों से दूर, सुकून से जीने की।
हिंदी शायरी संग्रहहिंदी कविता कोश
मेरे स्वाभिमान को, वो अक्सर कुचलते हैं,
रिश्तेदार होकर भी, मुझे नीचा दिखाते हैं।
उनकी बातों में ज़हर है, उनके रवैये में अकड़,
रिश्तेदारों से बेहतर, अकेला रहना है सब्र।
जब मैं चुप रहता हूँ, वो मुझे कमज़ोर समझते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मेरी खामोशी को नहीं समझते।
मेरी तरक्की से जलते हैं, मेरी खुशी से घबराते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, बस यही करते हैं।
पीठ पीछे बुराई करते हैं, सामने बनते हैं महान,
रिश्तेदारों का दोहरापन, अब मैं चुकाना नहीं मान।
मुझे गिराने की साजिश, हर पल रचते हैं,
रिश्तेदार होकर भी, दुश्मन से कम नहीं लगते हैं।
उनकी सलाहें नहीं चाहिए, उनके ताने नहीं,
रिश्तेदारों की बातों में, अब कोई दम नहीं।
जब खुद कुछ नहीं कर पाते, तो औरों को रोकते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, दूसरों की राहों में कांटे बोते हैं।
मेरी खुशियों पर पहरा, मेरे सपनों पर वार,
रिश्तेदारों ने ही तो, किया है मेरा जीना दुश्वार।
दिखावे की हँसी उनकी, अब मैं समझ गया हूँ,
रिश्तेदारों की असलियत से, अब मैं वाकिफ हो गया हूँ।
मेरी कामयाबी से ज़्यादा, मेरी हार पर ध्यान देते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, बस यही करते हैं।
अपनी राय थोपते हैं, अपनी बात मनवाते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, बस खुद को ही सही बताते हैं।
मुझे बदलने की कोशिश, हर पल करते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मेरे वजूद को नकारते हैं।
जब मैं अपनी राह चलता हूँ, तो वो जलते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मुझे पीछे खींचते हैं।
उनकी बातों से अब, मुझे फर्क नहीं पड़ता,
रिश्तेदारों की सोच से, अब मेरा मन नहीं लड़ता।
आत्मसम्मान मेरा, सबसे बढ़कर है,
रिश्तेदारों की बातों से, अब मैं नहीं डरता।
मैंने सीख लिया है, खुद पर भरोसा करना,
रिश्तेदारों की बातों पर, अब नहीं मरना।
उनकी नीयत खराब है, उनके इरादे गंदे,
रिश्तेदारों से दूर रहना, अब यही है फंदे।
जब तक मैं चुप था, वो मुझे दबाते रहे,
रिश्तेदार अक्सर, ऐसी ही चालें चलते रहे।
अब मैंने ठान लिया है, अपनी राह चुनना,
रिश्तेदारों की बातों को, अब नहीं सुनना।
मेरी खुशी में वो खुश नहीं, मेरे गम में वो दूर,
रिश्तेदारों की दुनिया में, बस यही है दस्तूर।
वो कहते हैं हम एक हैं, पर करते हैं भेदभाव,
रिश्तेदारों की बातों में, अब नहीं कोई भाव।
अपनी जिंदगी अपने दम पर, मैं अब जी रहा हूँ,
रिश्तेदारों की परवाह, अब नहीं कर रहा हूँ।
मुझे खुद पर भरोसा है, अपनी काबिलियत पर,
रिश्तेदारों की बातों का, मुझ पर असर नहीं अब।
रिश्तेदारों की बातें, अब मेरे लिए बेकार हैं,
मेरी अपनी दुनिया में, बस मेरे ही विचार हैं।
दैनिक भास्कर समाचारनवभारत टाइम्स
हमारा अंदाज़ शाही, रिश्तेदारों को चुभता है,
हमारी शान देखकर, उनका दिल जलता है।
वो सोचते हैं हमें गिरा देंगे, पर ये उनकी भूल है,
हम तो आसमान छूने वाले, रिश्तेदार बेफजूल हैं।
हमारी हैसियत देखकर, उनकी नींद उड़ जाती है,
रिश्तेदारों की बातें, हमें अब नहीं भाती हैं।
वो समझते हैं हम अकेले हैं, पर हमारे साथ खुदा है,
रिश्तेदारों का सहारा, हमें अब नहीं जुदा है।
हम अपनी शर्तों पर जीते हैं, अपनी मर्ज़ी से चलते हैं,
रिश्तेदारों की परवाह, अब नहीं करते हैं।
हमारी शान-ओ-शौकत, उन्हें रास नहीं आती,
रिश्तेदारों की बातें, हमें अब हँसाती हैं।
हमारा रुतबा अलग है, हमारा मुकाम अलग,
रिश्तेदारों की सोच से, हम बहुत अलग।
वो हमें कम आँकते हैं, पर हम तो शेर हैं,
रिश्तेदारों की बातें, अब हमें नहीं घेरें।
हमारी पहचान हमारे कर्मों से है, नाम से नहीं,
रिश्तेदारों की सोच, अब हमारे काम की नहीं।
हमारा सफर अकेला है, पर मंज़िल हमारी है,
रिश्तेदारों की बातें, अब हमें नहीं न्यारी हैं।
वो हमें सिखाते हैं, पर हम खुद उस्ताद हैं,
रिश्तेदारों की दुनिया में, हम अब नहीं आबाद हैं।
हमारी खामोशी हमारी ताकत है, हमारा जवाब नहीं,
रिश्तेदारों की बातों का, अब कोई हिसाब नहीं।
हमारा वजूद हमारी मर्ज़ी है, किसी की मेहरबानी नहीं,
रिश्तेदारों की बातों से, अब हमें कोई हैरानी नहीं।
हमारा रास्ता हमने खुद बनाया है, किसी का एहसान नहीं,
रिश्तेदारों की बातों से, अब हमें कोई नुकसान नहीं।
हमारा अतीत हमारा सबक है, हमारा भविष्य हमारा है,
रिश्तेदारों की बातों से, अब हमें कोई किनारा है।
हमारा सफर जारी है, हमारी उड़ान ऊंची है,
रिश्तेदारों की बातें, अब हमें नहीं छूती हैं।
हमारी जीत हमारी मेहनत है, किसी की दुआ नहीं,
रिश्तेदारों की बातें, अब हमें नहीं धुआँ।
हमारा नाम हमारा सम्मान है, किसी की पहचान नहीं,
रिश्तेदारों की बातों का, अब कोई निशान नहीं।
हमारा रास्ता साफ है, हमारी मंज़िल करीब है,
रिश्तेदारों की बातें, अब नहीं हमें अज़ीब है।
हमारा दिल बड़ा है, हमारी सोच बड़ी है,
रिश्तेदारों की बातें, अब हमें नहीं खड़ी है।
हमारा सफर शुरू हुआ है, हमारी कहानी लिखी जा रही है,
रिश्तेदारों की बातें, अब हमें नहीं डरा रही है।
हमारा जुनून हमारी ताकत है, हमारा हौसला बुलंद है,
रिश्तेदारों की बातें, अब हमें नहीं पसंद है।
हमारा भविष्य उज्ज्वल है, हमारा कल बेहतर है,
रिश्तेदारों की बातें, अब हमें नहीं ठहर है।
हमारी उड़ान बहुत ऊपर है, वो ज़मीन पर हैं,
रिश्तेदारों की बातें, अब हमें नहीं चुभती हैं।
हमारा दिल सच्चा है, हमारी सोच निर्मल है,
रिश्तेदारों की बातों से, अब हमें कोई हलचल नहीं है।
दैनिक जागरण समाचारआज तक समाचार
रिश्तेदारों की दुनिया, किसी माफ़िया से कम नहीं,
पीठ पीछे वार करते हैं, सामने बनते हैं हमदम।
उनकी चालें बड़ी गहरी, उनके इरादे खतरनाक,
रिश्तेदारों से बचकर रहना, यही है मेरा सबक।
प्यार का मुखौटा पहने, धोखे का वार करते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, दिल को तार-तार करते हैं।
जब से समझा है मैंने, इनकी असलियत को,
तब से हर रिश्ते पर, मुझे शक होता है।
खुशियों में शामिल नहीं, पर गम में ज़रूर आते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, सिर्फ़ तमाशा दिखाते हैं।
मेरी बर्बादी चाहते हैं, मेरी तरक्की से जलते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, यही करते हैं।
उनके मीठे बोलों में, छुपा है ज़हर का प्याला,
रिश्तेदारों की दुनिया, है एक मायाजाल।
जब तक मतलब है उनसे, तब तक साथ रहते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मतलब के यार होते हैं।
मुझे फँसाने की कोशिश, हर पल करते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मुझे बर्बाद करना चाहते हैं।
उनकी बातों पर भरोसा, करना मेरी भूल थी,
रिश्तेदारों की असलियत, अब मुझे कबूल थी।
अब मैं किसी पर, भरोसा नहीं करता हूँ,
रिश्तेदारों की चालों से, अब मैं नहीं डरता हूँ।
मेरी आँखों में अब, उनके लिए कोई जगह नहीं,
रिश्तेदारों की धोखेबाज़ी, अब कोई नई नहीं।
मैंने सीख लिया है, अकेले जीना,
रिश्तेदारों की बातों का, अब नहीं पीना।
उनकी साजिशें अब, मुझे नहीं डरा सकतीं,
रिश्तेदारों की बातें, अब मुझे नहीं सता सकतीं।
मैं अपनी राह पर चलूंगा, अपनी मंज़िल पाऊंगा,
रिश्तेदारों की बातों को, अब मैं नहीं दोहराऊंगा।
मेरी ताकत मेरी हिम्मत है, मेरा हौसला बुलंद,
रिश्तेदारों की बातें, अब नहीं करतीं बंद।
अब मुझे पता है, कौन अपना है कौन पराया,
रिश्तेदारों की दुनिया में, सबने मुझे आज़माया।
उनकी फितरत में धोखा है, उनकी बातों में झूठ,
रिश्तेदारों से दूर रहना, यही है मेरा रूट।
मैंने खुद को मजबूत बनाया है, किसी का सहारा नहीं,
रिश्तेदारों की बातों का, अब कोई इशारा नहीं।
उनकी हँसी में भी, मुझे दर्द नज़र आता है,
रिश्तेदारों का प्यार, अब सिर्फ़ दिखावा लगता है।
मेरी ज़िंदगी मेरी है, मैं अपनी राह बनाऊंगा,
रिश्तेदारों की बातों में, अब मैं नहीं आऊंगा।
उनकी दुआओं से ज़्यादा, उनकी बददुआएं हैं,
रिश्तेदारों की दुनिया में, बस यही सच्चाई है।
मैं अपनी धुन में मगन हूँ, अपनी मंज़िल की ओर,
रिश्तेदारों की बातों का, अब नहीं कोई ज़ोर।
अब मुझे किसी से, कोई उम्मीद नहीं है,
रिश्तेदारों की दुनिया, अब मेरे लिए ठीक नहीं है।
मेरी खुशियाँ मेरे साथ हैं, मेरा गम मेरे पास है,
रिश्तेदारों की दुनिया में, बस यही है खास।
अमर उजाला समाचारएनडीटीवी इंडिया
लोग मुझे बुरा कहते हैं, और रिश्तेदारों ने बदनाम किया,
मेरी अच्छाइयों को छोड़कर, सिर्फ़ बुराईयों पर ध्यान दिया।
मेरी हर गलती को, वो बढ़ा-चढ़ा कर बताते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मुझे नीचा दिखाते हैं।
मेरे बारे में गलत बातें, वो फैलाते हैं हर जगह,
रिश्तेदार अक्सर, मेरा नाम खराब करते हैं।
मुझे बदनाम करने में, उन्हें खुशी मिलती है,
रिश्तेदारों की बातें, अब मुझे नहीं चुभती हैं।
मेरी सादगी उन्हें रास नहीं आती, मेरा अंदाज़ अलग है,
रिश्तेदारों की सोच से, मैं बहुत अलग हूँ।
वो मुझे समझते हैं, एक बिगड़ा हुआ लड़का,
रिश्तेदारों की बातें, अब मुझे नहीं खड़का।
मेरी सच्चाई उन्हें नहीं दिखती, सिर्फ़ मेरी गलतियाँ,
रिश्तेदारों की बातें, अब मुझे नहीं जकड़तीं।
मैंने अपनी राह खुद चुनी है, अपने फैसले खुद लिए हैं,
रिश्तेदारों की बातों को, मैंने अब नहीं दिए हैं।
मुझे किसी की परवाह नहीं, मैं अपनी धुन में रहता हूँ,
रिश्तेदारों की बातों को, अब मैं नहीं सहता हूँ।
मेरी इमेज खराब करते हैं, मुझे बुरा बताते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मुझे ही सताते हैं।
मैंने अपने दम पर जीना सीखा है, किसी का सहारा नहीं,
रिश्तेदारों की बातों का, अब कोई किनारा नहीं।
मेरी जिंदगी मेरी है, मैं जैसे चाहूँ वैसे जीऊंगा,
रिश्तेदारों की बातों को, अब मैं नहीं पीऊंगा।
मुझे बदनाम करने वालों को, मेरा जवाब है,
रिश्तेदारों की सोच, अब मेरे लिए खराब है।
मैं अपने फैसलों का खुद जिम्मेदार हूँ, किसी और का नहीं,
रिश्तेदारों की बातों पर, अब मैं नहीं सहता हूँ।
मेरी जिंदगी का मालिक मैं हूँ, कोई और नहीं,
रिश्तेदारों की बातें, अब मेरे लिए शोर नहीं।
मुझे गलत समझने वालों को, मैं क्या कहूँ,
रिश्तेदारों की बातें, अब मैं नहीं सुनूँ।
मेरी पहचान मेरे काम से है, मेरे नाम से नहीं,
रिश्तेदारों की बातों का, अब कोई दाम नहीं।
मैंने अपने रास्ते खुद बनाए हैं, किसी के नक्शे कदम पर नहीं,
रिश्तेदारों की बातों से, अब मैं नहीं थम।
मेरी खुशी मेरी है, मेरा गम मेरा है,
रिश्तेदारों की बातें, अब मेरे लिए बेरंग है।
मैं अपनी जिंदगी का हीरो हूँ, कोई और नहीं,
रिश्तेदारों की बातें, अब मेरे लिए बोरिंग हैं।
मुझे बदनाम करने वालों को, मेरा सलाम है,
रिश्तेदारों की बातें, अब मेरे लिए बेनाम हैं।
मेरी उड़ान ऊंची है, मेरी सोच गहरी है,
रिश्तेदारों की बातें, अब मेरे लिए फहरी हैं।
मैं अपने सपनों को पूरा करूँगा, किसी की परवाह नहीं,
रिश्तेदारों की बातें, अब मेरे लिए बेकार हैं।
मेरी जिंदगी का हर पल, मैं खुद लिखूँगा,
रिश्तेदारों की बातों को, अब मैं नहीं देखूँगा।
मुझे बदनाम करने वालों को, मेरा जवाब है,
रिश्तेदारों की सोच, अब मेरे लिए खराब है।
रिश्तेदारों की चालें, बड़ी खतरनाक होती हैं,
मीठे बोलों में अक्सर, ज़हर घोलती हैं।
उनकी नीयत में खोट है, उनके इरादे बुरे हैं,
रिश्तेदार अक्सर, दिल को चूर-चूर करते हैं।
मुझे बर्बाद करने की, वो हर कोशिश करते हैं,
रिश्तेदार होकर भी, दुश्मन से ज़्यादा डरते हैं।
उनकी हँसी में भी, मुझे साजिश नज़र आती है,
रिश्तेदारों की बातें, अब मुझे नहीं भाती हैं।
वो मेरी जिंदगी में, आग लगाना चाहते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मुझे जलाना चाहते हैं।
उनकी हर बात में, मुझे धोखा नज़र आता है,
रिश्तेदारों का साथ, अब मुझे नहीं भाता है।
मुझे गिराने की साजिशें, वो हर पल करते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मेरे खिलाफ षड्यंत्र रचते हैं।
उनकी जुबान पर शहद है, पर दिल में खंजर,
रिश्तेदारों की दुनिया, है एक बड़ा मंजर।
मुझे फँसाने की कोशिश, वो हर पल करते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मुझे अंधेरे में रखते हैं।
उनकी नज़रों में जलन है, उनकी बातों में आग,
रिश्तेदारों से दूर रहना, यही है मेरा त्याग।
मेरी खुशियों से उन्हें, हमेशा तकलीफ होती है,
रिश्तेदारों की सोच, बड़ी अजीब होती है।
वो मेरा बुरा चाहते हैं, मेरा अच्छा नहीं,
रिश्तेदारों की दुनिया में, कुछ भी सच्चा नहीं।
मुझे अकेला देखकर, वो खुश होते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मुझे रुलाते हैं।
उनकी बातें अब, मुझे नहीं डरा सकतीं,
रिश्तेदारों की चालें, अब मुझे नहीं फंसा सकतीं।
मैंने सीख लिया है, उनसे दूर रहना,
रिश्तेदारों की बातों को, अब नहीं सहना।
मेरी जिंदगी मेरी है, मैं अपनी राह बनाऊंगा,
रिश्तेदारों की बातों में, अब मैं नहीं आऊंगा।
उनकी नफरत में भी, मुझे प्यार नज़र आता है,
रिश्तेदारों का साथ, अब मुझे नहीं भाता है।
मुझे गिराने की कोशिशें, वो हर पल करते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मुझे बदनाम करते हैं।
उनकी बातें अब, मेरे लिए बेमानी हैं,
रिश्तेदारों की दुनिया में, सिर्फ़ हैरानी है।
मैंने अपनी पहचान खुद बनाई है, किसी की मोहताज नहीं,
रिश्तेदारों की बातों का, अब कोई राज नहीं।
मेरी जिंदगी का हर फैसला, मैं खुद लेता हूँ,
रिश्तेदारों की बातों को, अब मैं नहीं देता हूँ।
उनकी साजिशें अब, मुझे नहीं हरा सकतीं,
रिश्तेदारों की बातें, अब मुझे नहीं डरा सकतीं।
मैं अपनी राह पर चलूंगा, अपनी मंज़िल पाऊंगा,
रिश्तेदारों की बातों को, अब मैं नहीं दोहराऊंगा।
मेरी ताकत मेरी हिम्मत है, मेरा हौसला बुलंद,
रिश्तेदारों की बातें, अब नहीं करतीं बंद।
अब मुझे पता है, कौन अपना है कौन पराया,
रिश्तेदारों की दुनिया में, सबने मुझे आज़माया।
रिश्तेदारों की बातें, अब कैप्शन बन गई हैं,
मेरे दर्द की कहानी, अब इंस्टाग्राम पर छप गई है।
उनकी हँसी में भी, मुझे दर्द नज़र आता है,
रिश्तेदारों का प्यार, अब सिर्फ़ दिखावा लगता है।
मेरी जिंदगी का हर पल, अब एक कहानी है,
रिश्तेदारों की बातें, अब बेमानी हैं।
मुझे अकेला छोड़कर, वो खुशियाँ मनाते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मुझे ही सताते हैं।
उनकी बातें तीर सी चुभती हैं, दिल में मेरे,
रिश्तेदारों की बातें, ज़ख्म देती हैं गहरे।
अब मुझे किसी से, कोई उम्मीद नहीं है,
रिश्तेदारों की दुनिया, अब मेरे लिए ठीक नहीं है।
मेरी खुशियाँ मेरे साथ हैं, मेरा गम मेरे पास है,
रिश्तेदारों की दुनिया में, बस यही है खास।
उनकी बातों में जहर है, उनके दिलों में स्वार्थ,
रिश्तेदारों से बेहतर, अकेला रहना है सार्थक।
जब से समझा है मैंने, रिश्तेदारों का सच,
तब से हर रिश्ता, लगता है बेमच।
रिश्तेदारों की महफ़िल में, मेरा दम घुटता है,
सच्चा प्यार ढूँढने में, दिल भटकता है।
अब तो आदत हो गई है, अकेले रहने की,
रिश्तेदारों से दूर, सुकून से जीने की।
मेरे स्वाभिमान को, वो अक्सर कुचलते हैं,
रिश्तेदार होकर भी, मुझे नीचा दिखाते हैं।
उनकी बातों में ज़हर है, उनके रवैये में अकड़,
रिश्तेदारों से बेहतर, अकेला रहना है सब्र।
जब मैं चुप रहता हूँ, वो मुझे कमज़ोर समझते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मेरी खामोशी को नहीं समझते।
मेरी तरक्की से जलते हैं, मेरी खुशी से घबराते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, बस यही करते हैं।
पीठ पीछे बुराई करते हैं, सामने बनते हैं महान,
रिश्तेदारों का दोहरापन, अब मैं चुकाना नहीं मान।
मुझे गिराने की साजिश, हर पल रचते हैं,
रिश्तेदार होकर भी, दुश्मन से कम नहीं लगते हैं।
उनकी सलाहें नहीं चाहिए, उनके ताने नहीं,
रिश्तेदारों की बातों में, अब कोई दम नहीं।
जब खुद कुछ नहीं कर पाते, तो औरों को रोकते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, दूसरों की राहों में कांटे बोते हैं।
मेरी खुशियों पर पहरा, मेरे सपनों पर वार,
रिश्तेदारों ने ही तो, किया है मेरा जीना दुश्वार।
दिखावे की हँसी उनकी, अब मैं समझ गया हूँ,
रिश्तेदारों की असलियत से, अब मैं वाकिफ हो गया हूँ।
मेरी कामयाबी से ज़्यादा, मेरी हार पर ध्यान देते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, बस यही करते हैं।
अपनी राय थोपते हैं, अपनी बात मनवाते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, बस खुद को ही सही बताते हैं।
मुझे बदलने की कोशिश, हर पल करते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मेरे वजूद को नकारते हैं।
जब मैं अपनी राह चलता हूँ, तो वो जलते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मुझे पीछे खींचते हैं।
रिश्तेदारों की बातें, अब स्टेटस बन गई हैं,
मेरे दिल के दर्द की कहानी, अब व्हाट्सएप पर छप गई है।
उनकी हँसी में भी, मुझे दर्द नज़र आता है,
रिश्तेदारों का प्यार, अब सिर्फ़ दिखावा लगता है।
मेरी जिंदगी का हर पल, अब एक कहानी है,
रिश्तेदारों की बातें, अब बेमानी हैं।
मुझे अकेला छोड़कर, वो खुशियाँ मनाते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मुझे ही सताते हैं।
उनकी बातें तीर सी चुभती हैं, दिल में मेरे,
रिश्तेदारों की बातें, ज़ख्म देती हैं गहरे।
अब मुझे किसी से, कोई उम्मीद नहीं है,
रिश्तेदारों की दुनिया, अब मेरे लिए ठीक नहीं है।
मेरी खुशियाँ मेरे साथ हैं, मेरा गम मेरे पास है,
रिश्तेदारों की दुनिया में, बस यही है खास।
उनकी बातों में जहर है, उनके दिलों में स्वार्थ,
रिश्तेदारों से बेहतर, अकेला रहना है सार्थक।
जब से समझा है मैंने, रिश्तेदारों का सच,
तब से हर रिश्ता, लगता है बेमच।
रिश्तेदारों की महफ़िल में, मेरा दम घुटता है,
सच्चा प्यार ढूँढने में, दिल भटकता है।
अब तो आदत हो गई है, अकेले रहने की,
रिश्तेदारों से दूर, सुकून से जीने की।
मेरे स्वाभिमान को, वो अक्सर कुचलते हैं,
रिश्तेदार होकर भी, मुझे नीचा दिखाते हैं।
उनकी बातों में ज़हर है, उनके रवैये में अकड़,
रिश्तेदारों से बेहतर, अकेला रहना है सब्र।
जब मैं चुप रहता हूँ, वो मुझे कमज़ोर समझते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मेरी खामोशी को नहीं समझते।
मेरी तरक्की से जलते हैं, मेरी खुशी से घबराते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, बस यही करते हैं।
पीठ पीछे बुराई करते हैं, सामने बनते हैं महान,
रिश्तेदारों का दोहरापन, अब मैं चुकाना नहीं मान।
मुझे गिराने की साजिश, हर पल रचते हैं,
रिश्तेदार होकर भी, दुश्मन से कम नहीं लगते हैं।
उनकी सलाहें नहीं चाहिए, उनके ताने नहीं,
रिश्तेदारों की बातों में, अब कोई दम नहीं।
जब खुद कुछ नहीं कर पाते, तो औरों को रोकते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, दूसरों की राहों में कांटे बोते हैं।
मेरी खुशियों पर पहरा, मेरे सपनों पर वार,
रिश्तेदारों ने ही तो, किया है मेरा जीना दुश्वार।
दिखावे की हँसी उनकी, अब मैं समझ गया हूँ,
रिश्तेदारों की असलियत से, अब मैं वाकिफ हो गया हूँ।
मेरी कामयाबी से ज़्यादा, मेरी हार पर ध्यान देते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, बस यही करते हैं।
अपनी राय थोपते हैं, अपनी बात मनवाते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, बस खुद को ही सही बताते हैं।
मुझे बदलने की कोशिश, हर पल करते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मेरे वजूद को नकारते हैं।
जब मैं अपनी राह चलता हूँ, तो वो जलते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मुझे पीछे खींचते हैं।
रिश्तेदारों की बातों ने, दिल को कर दिया छलनी,
उनके झूठे प्यार ने, मेरी रूह को कर दिया पतली।
उनकी हर सलाह में, मुझे स्वार्थ नज़र आता है,
रिश्तेदारों का साथ, अब मुझे नहीं भाता है।
जब से मैंने समझा है, इनकी असलियत को,
तब से हर रिश्ते पर, मुझे शक होता है।
खुशियों में शामिल नहीं, पर गम में ज़रूर आते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, सिर्फ़ तमाशा दिखाते हैं।
मेरी बर्बादी चाहते हैं, मेरी तरक्की से जलते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, यही करते हैं।
उनके मीठे बोलों में, छुपा है ज़हर का प्याला,
रिश्तेदारों की दुनिया, है एक मायाजाल।
जब तक मतलब है उनसे, तब तक साथ रहते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मतलब के यार होते हैं।
मुझे फँसाने की कोशिश, हर पल करते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मुझे बर्बाद करना चाहते हैं।
उनकी बातों पर भरोसा, करना मेरी भूल थी,
रिश्तेदारों की असलियत, अब मुझे कबूल थी।
अब मैं किसी पर, भरोसा नहीं करता हूँ,
रिश्तेदारों की चालों से, अब मैं नहीं डरता हूँ।
मेरी आँखों में अब, उनके लिए कोई जगह नहीं,
रिश्तेदारों की धोखेबाज़ी, अब कोई नई नहीं।
मैंने सीख लिया है, अकेले जीना,
रिश्तेदारों की बातों का, अब नहीं पीना।
उनकी साजिशें अब, मुझे नहीं डरा सकतीं,
रिश्तेदारों की बातें, अब मुझे नहीं सता सकतीं।
मैं अपनी राह पर चलूंगा, अपनी मंज़िल पाऊंगा,
रिश्तेदारों की बातों को, अब मैं नहीं दोहराऊंगा।
मेरी ताकत मेरी हिम्मत है, मेरा हौसला बुलंद,
रिश्तेदारों की बातें, अब नहीं करतीं बंद।
अब मुझे पता है, कौन अपना है कौन पराया,
रिश्तेदारों की दुनिया में, सबने मुझे आज़माया।
उनकी फितरत में धोखा है, उनकी बातों में झूठ,
रिश्तेदारों से दूर रहना, यही है मेरा रूट।
मैंने खुद को मजबूत बनाया है, किसी का सहारा नहीं,
रिश्तेदारों की बातों का, अब कोई इशारा नहीं।
उनकी हँसी में भी, मुझे दर्द नज़र आता है,
रिश्तेदारों का प्यार, अब सिर्फ़ दिखावा लगता है।
मेरी ज़िंदगी मेरी है, मैं अपनी राह बनाऊंगा,
रिश्तेदारों की बातों में, अब मैं नहीं आऊंगा।
उनकी दुआओं से ज़्यादा, उनकी बददुआएं हैं,
रिश्तेदारों की दुनिया में, बस यही सच्चाई है।
मैं अपनी धुन में मगन हूँ, अपनी मंज़िल की ओर,
रिश्तेदारों की बातों का, अब नहीं कोई ज़ोर।
अब मुझे किसी से, कोई उम्मीद नहीं है,
रिश्तेदारों की दुनिया, अब मेरे लिए ठीक नहीं है।
मेरी खुशियाँ मेरे साथ हैं, मेरा गम मेरे पास है,
रिश्तेदारों की दुनिया में, बस यही है खास।
साल बदला, पर रिश्तेदारों का रवैया नहीं,
उनके ताने आज भी, मेरे दिल को छलनी करते हैं।
नई उम्मीदें लेकर आया हूँ, पर वो पुरानी बातें दोहराते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मुझे पीछे खींचते हैं।
मेरी तरक्की से जलते हैं, मेरी खुशी से घबराते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, बस यही करते हैं।
पीठ पीछे बुराई करते हैं, सामने बनते हैं महान,
रिश्तेदारों का दोहरापन, अब मैं चुकाना नहीं मान।
मुझे गिराने की साजिश, हर पल रचते हैं,
रिश्तेदार होकर भी, दुश्मन से कम नहीं लगते हैं।
उनकी सलाहें नहीं चाहिए, उनके ताने नहीं,
रिश्तेदारों की बातों में, अब कोई दम नहीं।
जब खुद कुछ नहीं कर पाते, तो औरों को रोकते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, दूसरों की राहों में कांटे बोते हैं।
मेरी खुशियों पर पहरा, मेरे सपनों पर वार,
रिश्तेदारों ने ही तो, किया है मेरा जीना दुश्वार।
दिखावे की हँसी उनकी, अब मैं समझ गया हूँ,
रिश्तेदारों की असलियत से, अब मैं वाकिफ हो गया हूँ।
मेरी कामयाबी से ज़्यादा, मेरी हार पर ध्यान देते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, बस यही करते हैं।
अपनी राय थोपते हैं, अपनी बात मनवाते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, बस खुद को ही सही बताते हैं।
मुझे बदलने की कोशिश, हर पल करते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मेरे वजूद को नकारते हैं।
जब मैं अपनी राह चलता हूँ, तो वो जलते हैं,
रिश्तेदार अक्सर, मुझे पीछे खींचते हैं।
उनकी बातों से अब, मुझे फर्क नहीं पड़ता,
रिश्तेदारों की सोच से, अब मेरा मन नहीं लड़ता।
आत्मसम्मान मेरा, सबसे बढ़कर है,
रिश्तेदारों की बातों से, अब मैं नहीं डरता।
मैंने सीख लिया है, खुद पर भरोसा करना,
रिश्तेदारों की बातों पर, अब नहीं मरना।
उनकी नीयत खराब है, उनके इरादे गंदे,
रिश्तेदारों से दूर रहना, अब यही है फंदे।
जब तक मैं चुप था, वो मुझे दबाते रहे,
रिश्तेदार अक्सर, ऐसी ही चालें चलते रहे।
अब मैंने ठान लिया है, अपनी राह चुनना,
रिश्तेदारों की बातों को, अब नहीं सुनना।
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Bayjid एक हिंदी कंटेंट राइटर और शायर हैं। वे लव शायरी, रोमांटिक शायरी, सैड शायरी और जिंदगी से जुड़ी शायरी लिखते हैं। उनका उद्देश्य शब्दों के माध्यम से भावनाओं को खूबसूरती से व्यक्त करना है।