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त्योहारों का मौसम अक्सर खुशियों की सौगात लेकर आता है, लेकिन जब दिल के किसी गहरे कोने में कोई ज़ख्म छिपा हो, तो ये ही त्योहार सबसे ज्यादा रुलाते हैं। फागुन की हवाओं में गुलाल तो उड़ता है, पर किसी अपने के हमेशा के लिए चले जाने के बाद वो लाल रंग भी खौफनाक और बेजान सा लगने लगता है। इंटरनेट पर Holi Sad Shayari खोजते हुए आप शायद उन लफ्ज़ों की तलाश में हैं जो आपके भीतर की उस घुटन और तन्हाई को एक आवाज़ दे सकें।
रंगों के इस शोर-शराबे में एक अजीब सी खामोशी होती है, जो सिर्फ वही इंसान सुन सकता है जिसने भीड़ में अपना सबसे अज़ीज़ शख्स खोया हो। यह लेख उस दर्द, उस विरह और उन आंसुओं को समर्पित है जो दूसरों की नज़रों से छुपकर बहाए जाते हैं। आइए, खास तौर पर रची गई इन पंक्तियों में अपनी उन अनकही भावनाओं को टटोलें, जहाँ हर रंग महज़ एक दाग मालूम होता है और हर खुशी एक नए सदमे का पैगाम लेकर आती है।
जब घर के आंगन में पुरानी यादें बिखरी हों, तो बाहर उड़ने वाला कोई भी गुलाल मन को नहीं लुभाता। तन्हा त्योहार का यह मंज़र उस इंसान के लिए किसी सज़ा से कम नहीं होता, जिसने बीते फागुन में किसी के साथ मुस्कुराने के ख्वाब देखे थे।
यहाँ दर्ज कविताएँ उसी वीरान पड़े आंगन और उन खुरदरी यादों की दास्तान बयां करती हैं। इनमें वह दर्द है जो ढोल की तेज़ आवाज़ों के बीच भी सीने में चुपचाप चीखता रहता है।
हवाओं ने फिर उसी चौखट पर दस्तक दी है
जहाँ पिछले फागुन हमारी दुनिया बिखरी थी।
आंगन में पड़ी राख को गुलाल समझ बैठे
हम अपनी ही जली हुई उम्मीदों से खेल बैठे।

चौबारे पर अब कोई इंतज़ार नहीं करता
अब कोई मेरे चेहरे पर अपने हिस्से का हक नहीं जताता।
नज़रें आज भी उस मोड़ पर ठहरी हुई हैं
जहाँ से तुमने वापसी का रास्ता हमेशा के लिए भुला दिया।
भीड़ बहुत है आज नुक्कड़ के उस पुराने चौराहे पर
बस एक मेरे ही हिस्से में खौफनाक सन्नाटा लिखा है।
इन हथेलियों पर जो लाल रंग जम गया है
ये किसी गुलाल का नहीं, मेरे जज़्बातों का खून है।
बधाइयों के शोर में मैंने अपने कानों को मूँद लिया है
तुम्हारी आवाज़ के बिना हर लफ्ज़ चुभता बहुत है।
वो जो एक लिबास तुमने मेरे लिए कभी चुना था
आज उसी को कफ़न मानकर इस भीड़ में खड़ा हूँ।
चेहरे पर लगे इस झूठे आवरण को कौन पहचानेगा
भीतर की वीरानी को यह चमकीला पर्दा बहुत अच्छे से ढकता है।
दीवारों पर लगे वो पुराने निशानों ने आज फिर रुलाया
वक्त ने रंग तो उड़ा दिए, पर वो अक्स नहीं मिटाया।
मैं आज भी उसी मुंडेर पर खड़ा हवाओं को तकता हूँ
शायद किसी झोंके में तेरी वो पुरानी महक लौट आए।
खिलखिलाहटों का ये दौर मुझे रास नहीं आता
मेरे अंदर का श्मशान इन रौनकों से बहुत घबराता है।
हाथों में जो थोड़ा सा अबीर बचा रह गया था
उसे मैंने दरिया में अपनी ख्वाहिशों के साथ बहा दिया।

कोई तो बता दे इन बादलों को कि अब यहाँ कोई नहीं रहता
ये खामखां मेरे वीरान घरौंदे पर बरसने चले आते हैं।
रास्तों पर बिछी ये गुलाल की मखमली चादर
मेरे थके हुए कदमों को अब और नहीं लुभाती।
अधूरी मोहब्बत उस किताब की तरह होती है जिसका आखिरी पन्ना कभी पढ़ा ही नहीं गया। जब फागुन आता है, तो प्यार के वो सारे वादे याद आते हैं जो बीच रास्ते में ही दम तोड़ गए थे। इस हिस्से में उन भावनाओं को उकेरा गया है जहाँ इश्क तो सच्चा था, पर उसे मंज़िल तक पहुँचने का मुकाम हासिल न हुआ। ये शायरियां उन फीके पड़ते रंगों की कहानी हैं, जिनमें कभी दो दिलों की धड़कनें बसा करती थीं।
मेरे हिस्से की शामें अब भी सुर्ख लाल रहती हैं
पर उनमें तेरा वो मदहोश कर देने वाला वजूद नहीं होता।
हमने जो ख्वाब एक ही थाली में सजाए थे
आज वो हवा के एक ही झोंके में राख हो गए हैं।
तेरी गलियों से गुज़रने का अब कोई सबब नहीं बचा
मेरे हिस्से का वो चटक रंग अब तेरी देहरी पर नहीं जचता।
जिस अक्स को मैंने अपनी पुतलियों में संजोया था
आज वो किसी और के आंगन का हिस्सा बन चुका है।

दाग गहरा हो तो आसानी से छूटता नहीं है
शायद इसीलिए तेरी मोहब्बत का असर मुझ पर से मिटता नहीं है।
हमने तो अपने जज़्बातों की पूरी थाली ही पलट दी
पर तेरे हिस्से में फिर भी मेरी कोई अहमियत नहीं आई।
वो जो एक कतरा मेरे गालों पर ठहर सा गया था
आज उसी की चुभन ने मेरे पूरे वजूद को झकझोर दिया है।
मैं अक्सर उन रास्तों की धूल को माथे से लगा लेता हूँ
जहाँ कभी तेरे कदमों ने मेरे साथ चलने का दावा किया था।
अब इन लिबासों को कोई नया रंग रास नहीं आता
जिस पर तेरे इश्क की छाप हो, वो किसी और रंग में कैसे रंगे।
हमने अपने हिस्से का सारा नूर तेरी चौखट पर लुटा दिया
बदले में हमें सिर्फ इस बेरंग दुनिया का अकेलापन मिला।
जिन हाथों ने कभी मेरी बिखरी जुल्फें संवारी थीं
आज वही हाथ किसी और को गुलाल से नहला रहे हैं।
यह फागुन भी अब मुझसे कतरा कर गुज़र जाता है
जैसे इसे भी मेरी अधूरी कहानी से कोई खौफ आ गया हो।
तेरी यादों के भंवर में आज भी मैं उसी तरह डूब रहा हूँ
जैसे पानी में घुलने के बाद कोई रंग अपना अस्तित्व खो देता है।
वो जो एक मीठा सा फरेब तूने मुझे दिया था
आज उसी की कड़वाहट मेरे हर एक घूंट में शामिल है।

मेरी हथेलियों की लकीरों ने भी अब करवट बदल ली है
इनमें अब तेरे नाम का कोई हसीन इशारा नहीं बचता।
जब विरह की आग सीने में जल रही हो, तो आंखों का समंदर किसी भी वक्त छलक सकता है। लोग चेहरों पर सजे रंगों को देखते हैं, लेकिन उन मुस्कुराते होठों के पीछे जो आंसुओं की नमी छुपी होती है, उसे पहचानना बेहद मुश्किल होता है।
रंगों में छुपा विरह एक ऐसा दर्द है जो बयान नहीं किया जाता, बस खामोशी से सहा जाता है। ये पंक्तियां उसी दर्द भरे आवरण को बेनकाब करती हैं, जहाँ हर हंसी के पीछे एक गहरा शोक पल रहा है।
चेहरे पर लगी इस चमक को खुशी समझने की भूल मत करना
ये तो बस मेरे अश्कों को छिपाने का एक नया बहाना है।
आंखों के किनारों पर जो ये हल्की सी लाली है
ये गुलाल की नहीं, उन रातों की है जिनमें मैं सोया नहीं।
हवाओं में घुली ये मीठी सी ठंडक मुझे अब काटती है
तेरी गैरमौजूदगी ने इस पूरे मौसम को ही ज़हरीला कर दिया है।

पानी की जिन बूंदों से तू मुझे कभी भिगोया करता था
आज वही बूंदें मेरी आंखों से खारे पानी बनकर टपकती हैं।
लोगों ने तो मेरे लिबास को देखकर ही अंदाज़ा लगा लिया
उन्हें क्या पता कि मेरे भीतर कितनी चिताएं एक साथ जल रही हैं।
ये जो गालों पर एक मोटा सा पर्दा लगा दिया गया है
इसके पीछे मेरी वो पुरानी और थकी हुई परछाईं सिसक रही है।
मैं इस शोर में अपनी चीख को बहुत सफाई से दबा लेता हूँ
कोई देख न ले मेरी नमी, इसलिए नज़रों को झुका लेता हूँ।
हर एक उड़ता हुआ रंग मेरी पलकों पर बोझ सा बन जाता है
मैं इन खुशियों की महफिल में खुद को बहुत अजनबी पाता हूँ।
जिस पानी में हमने कभी अपने कल के सपने बुने थे
आज उसी पानी ने मेरी सारी उम्मीदों को बहा दिया है।
तेरी जुदाई का जो ये भारी सा पत्थर मेरे सीने पर है
इसे ये फागुन की हल्की हवाएं भी हिला नहीं पातीं।
मुस्कुराहटों की इस दुकान में मैं सबसे गरीब ग्राहक हूँ
मेरे पास अपनी इस उदासी के सिवा कोई और सिक्का नहीं है।
किसी ने मेरे माथे पर हाथ रखकर जो दुआ दी थी
वो दुआ भी इस वीरानी में अपना असर खो बैठी है।
आंसुओं की भी अपनी एक अलग ही ज़ुबान होती है
ये भरे बाज़ार में भी किसी को अपना राज़ नहीं बताते।

मेरी इन भीगी पलकों पर जो एक रंग ठहर सा गया है
उसी ने आज मेरे इस खामोश विलाप को बेनकाब कर दिया।
फासलों ने मेरे आंसुओं का मज़ाक कुछ यूं उड़ाया
कि इस भीड़ में कोई एक कंधा भी मुझे मयस्सर न हो पाया।
दिल टूटने की आवाज़ नहीं होती, लेकिन उसका सन्नाटा पूरे वजूद को बहरा कर देता है। जब इंसान भीतर से टूट चुका हो, तो बाहर बजने वाले ढोल-नगाड़े भी बेमानी लगते हैं।
फागुन का सन्नाटा उसी मनःस्थिति को दर्शाता है जहाँ बाहर भले ही बहार हो, लेकिन दिल के भीतर एक अनंत पतझड़ छा चुका है। टूटे दिल की इन गहराइयों में उतरकर रची गई ये शायरियां आपके मन की उसी घुटन को बाहर लाने का एक ज़रिया बनेंगी।
मेरे टूटे हुए वजूद का अब कोई तमाशा नहीं बनता
मैंने अपने ही खंडहरों पर एक खामोश पहरा लगा दिया है।
ढोल की हर एक थाप मेरे सीने पर एक हथौड़े सी लगती है
ये खुशियां मेरे इस बिखरे हुए जहान को और ज्यादा तोड़ती हैं।
जिस आईने में कभी हम अपना मुकम्मल अक्स देखते थे
आज उसके टुकड़ों में मुझे अपनी ही परछाई से डर लगता है।
पत्तों के झड़ने की आवाज़ फिर भी कानों को सुन जाती है
पर मेरे इस दिल के बिखरने की खबर किसी हवा को न लगी।
आसमान में जो ये तरह-तरह के रंग उभर रहे हैं
मुझे तो बस इनमें अपनी ही जलती हुई राख नज़र आ रही है।

मेरी सांसों में जो एक भारीपन सा आ गया है इन दिनों
ये तेरे जाने के बाद छोड़े गए उस भयंकर सन्नाटे का वज़न है।
हम तो उस पेड़ की तरह सूख चुके हैं इस मौसम में
जिस पर अब कोई भी नया पत्ता अपना घर नहीं बनाना चाहता।
तन्हाई ने मेरे इस सूने घर को कुछ ऐसे अपने गले लगाया है
जैसे सदियों से किसी और ने इस दरवाज़े पर दस्तक ही न दी हो।
कोई पूछे तो कह देना कि वो अब इस बस्ती में नहीं रहता
उसने अपने सारे जज़्बातों को एक अनजान तहखाने में दफना दिया है।
हंसी के ये ठहाके मुझे किसी नुकीले तीर जैसे चुभते हैं
मेरा ये दर्द अब किसी भी मरहम का कोई एहसान नहीं मानता।
जिस ज़मीन पर हमने कभी एक साथ अपने कदम रखे थे
आज वो ज़मीन मेरे इस अकेलेपन के बोझ से फट रही है।
मैंने अपनी सारी उम्मीदों को उस जलती हुई आग में फेंक दिया
जहाँ से अब केवल एक धुआं ही मेरे नसीब में बचा रह गया है।
रातों की नींद तो कब की इस सन्नाटे ने छीन ली थी
अब ये दिन की रौशनी भी मेरी आंखों को बहुत तकलीफ देती है।
मैंने अपने दिल के हर एक दरवाज़े पर ताला जड़ दिया है
अब कोई भी नया फरेब इस चौखट के भीतर नहीं आ सकता।
मेरी इस वीरान ज़िंदगी पर किसी और का कोई हक नहीं
मैंने अपनी बर्बादी का ये सारा जिम्मा खुद ही अपने सिर ले लिया है।
कुछ रंग ऐसे होते हैं जो कभी नहीं छूटते, खासकर वो जो बेवफाई की मिलावट से बने हों। जब कोई अपना धोखा देता है, तो वो विश्वास का जो कत्ल करता है, उसके दाग उम्र भर के लिए रूह पर छप जाते हैं।
इस भाग में उन दागों की चर्चा की गई है, जिन्होंने एक मासूम दिल को हमेशा के लिए पत्थर बना दिया। बेवफाई का ये ज़हर जब होली पर दर्द भरी शायरी में ढलता है, तो एक ऐसा मंज़र पेश करता है जो किसी भी इंसान की रूह कंपा सकता है।
उसने जो एक दाग मेरी पीठ पर बड़ी खामोशी से लगा दिया
वही दाग आज मेरी इस पूरी ज़िंदगी का इकलौता सच बन गया है।
भरोसे के उस कच्चे धागे को उसने जिस बेदर्दी से तोड़ा
उसी दिन मेरे अंदर के इंसान ने भी अपना दम तोड़ दिया।
वो जो बड़ी मासूमियत से मेरी आँखों में धूल झोंक गया
आज उसी की दी हुई राख से मैं अपने अश्कों को पोंछता हूँ।
तेरे फरेब का रंग तो दुनिया के हर रंग से ज्यादा पक्का निकला
मैंने कई बार अपनी रूह को धोया, पर ये दाग कभी न मिटा।
झूठे वादों की जो चादर तूने मेरे कंधों पर ओढ़ाई थी
आज वो चादर मुझे कांटों के किसी बड़े से बिस्तर जैसी लगती है।
मैंने तेरी हर एक खता को बहुत ही सादगी से नज़रअंदाज़ किया था
यही मेरी सबसे बड़ी भूल थी जिसका हर्जाना मैं आज तक भर रहा हूँ।
तूने जिस आसानी से मेरे जज़्बातों का वो सरेआम सौदा किया
मेरी इस बेबसी पर तो आज वो आसमान भी फूट-फूट कर रो दिया।
तेरे चेहरे के पीछे जो एक और खौफनाक चेहरा छिपा था
उसी ने मेरी इस हसीन सी दुनिया को पूरी तरह से वीरान कर दिया।
अब किसी भी नए वादे पर मेरा ये दिल यकीन नहीं करता
तेरी उस एक बेवफाई ने मुझे पूरी इंसानियत से ही डरा दिया है।
जो रंग तूने मेरी हथेलियों पर बड़े प्यार से लगाया था
वो दरअसल एक ज़हर था जो अब मेरी हर एक नस में दौड़ रहा है।
मेरे इस खालीपन को अब किसी भी झूठी दिलासे की ज़रूरत नहीं
मैंने तेरे उस फरेब को ही अपना सबसे पक्का हमसफ़र मान लिया है।
तूने मेरे भरोसे की जो एक इमारत बड़ी ही चालाकी से गिराई थी
उसके मलबे के नीचे आज भी मेरी कुछ सिसकती हुई दुआएं दबी हैं।
तेरी उस मुस्कुराहट में जो एक गहरा सा धोखा छिपा हुआ था
उसने मेरी हर एक सच्चाई को एक बहुत बड़े झूठ में बदल दिया।
मैंने तो अपना पूरा वजूद ही तेरी उस एक हां पर लुटा दिया था
बदले में तूने मुझे इस भरे बाज़ार में बिल्कुल अकेला खड़ा छोड़ दिया।
तेरे दिए हुए इन ज़ख्मों पर कोई भी नया रंग नहीं टिक सकता
मैंने अपनी इस बर्बादी को अब अपनी सबसे बड़ी पहचान बना लिया है।
दूरियां केवल मीलों की नहीं होतीं; दिलों के बीच के फासले सबसे ज्यादा झुलसाने वाले होते हैं। जब दो लोग एक ही आसमान के नीचे रहकर भी एक-दूसरे से अनजान हो जाते हैं, तब वो फासले किसी भी आग से ज्यादा तपिश देते हैं।
उजड़े हुए ख्वाबों और उस दूरी की घुटन को इस अंतिम खण्ड में समेटा गया है। ये पंक्तियां उस तड़प को दर्शाती हैं जहाँ इंसान अपनी ही बुनी हुई दुनिया के मलबे पर बैठा बस एक आखिरी उम्मीद के टूटने का इंतज़ार कर रहा होता है।
हमारे बीच की इस गहरी खाई को कोई भी पुल नहीं भर सकता
हमने अपने अपने रास्तों को कुछ इस कदर एक दूसरे से जुदा कर लिया है।
मेरी नज़रों के सामने मेरे ही हाथों से बुने वो ख्वाब जल रहे हैं
और मैं इस फासले की ज़ंजीरों में जकड़ा बस तमाशा देख रहा हूँ।
तेरे शहर की हवाएं अब मेरे इस गांव तक कभी नहीं आतीं
हमने अपनी इस दूरी को ही अपना मुकम्मल नसीब मान लिया है।
ख्वाबों के उस महल की अब कोई भी ईंट अपनी जगह पर नहीं है
तेरे जाने से जो एक आंधी आई थी, उसने सब कुछ तहस-नहस कर दिया।
मैंने जो एक छोटा सा आशियाना तेरी यादों के सहारे बनाया था
वक्त की इस तपिश ने उसे भी पूरी तरह से झुलसा कर रख दिया है।
हमारे दरमियां जो ये एक भारी सी खामोशी खड़ी हो गई है
इसी ने तो हमारे उन सारे हसीन लम्हों का बड़ी बेरहमी से कत्ल किया है।
अब इस दूरी को पाटने की मेरे भीतर कोई भी गुंजाइश नहीं बची
मैंने अपने थक चुके कदमों को इसी बंजर ज़मीन पर रोक लिया है।
तेरी और मेरी मंज़िलें अब कभी भी एक दूसरे से नहीं टकराएंगी
हमने अपने इस सफर को हमेशा के लिए एक अलग ही दिशा दे दी है।
उजड़े हुए उन बागीचों में अब कोई भी नया फूल नहीं खिलता
जहाँ से तूने अपने कदमों के निशानों को हमेशा के लिए मिटा दिया था।
दूरी का ये जो एक ज़हरीला सा एहसास मेरे सीने में घर कर गया है
ये मुझे हर पल बस यही बताता है कि अब यहाँ कुछ भी मेरा नहीं है।
हमने अपनी उन सारी पुरानी तस्वीरों को आज दरिया में बहा दिया
जिन तस्वीरों में हमारे बीच का ये खौफनाक फासला नज़र नहीं आता था।
अब कोई भी आवाज़ मुझे उस पार से इस पार नहीं बुलाती
मैंने अपने कानों को भी इस सन्नाटे का पूरी तरह से आदी बना दिया है।
तेरे और मेरे बीच का वो जो एक बेहद ही बारीक सा धागा था
उसे तो हालात की इस तेज़ धूप ने कब का सुखा कर तोड़ दिया है।
मैंने अपने हिस्से की सारी रौशनी तेरे उन दूर जाते कदमों पर लुटा दी
अब मेरे इस अंधेरे घर में किसी भी नए चिराग के जलने की कोई उम्मीद नहीं।
ये जो एक भयंकर सा फासला हम दोनों के बीच ठहर गया है
यही अब हमारी इस अधूरी कहानी का सबसे आखिरी और पक्का सच है।
1. दर्द भरी शायरी में अक्सर रंगों को नकारात्मक तरीके से क्यों दिखाया जाता है?
जब इंसान भीतर से उदास होता है, तो बाहर की खुशी और चटक रंग उसे अपनी मनोस्थिति के बिल्कुल विपरीत लगते हैं। इसीलिए, विरह या दुख में यही रंग चुभने वाले या दाग के रूप में प्रतीत होते हैं।
2. टूटे दिल की भावनाओं को व्यक्त करने का सबसे सही तरीका क्या है?
शायरी और कविताएं टूटे दिल की भावनाओं को व्यक्त करने का एक बेहद शांत और गहरा माध्यम हैं। इनके ज़रिए इंसान अपनी घुटन को शब्दों में ढालकर मन का बोझ हल्का कर सकता है।
3. क्या त्योहारों के समय अकेलापन ज्यादा महसूस होता है?
हाँ, क्योंकि त्योहारों पर हर तरफ लोगों का मेल-जोल और खुशियां होती हैं। ऐसे में जब किसी के पास अपना कोई अज़ीज़ नहीं होता, तो भीड़ में वह खुद को और भी ज्यादा अकेला और तन्हा पाता है।
4. मैं इन कविताओं को अपने प्रियजन तक कैसे पहुँचा सकता हूँ?
आप इन कविताओं को सीधे संदेश (मैसेज) के ज़रिए, सोशल मीडिया स्टेटस पर लगाकर, या फिर एक खत के रूप में लिखकर उस इंसान तक पहुंचा सकते हैं जिसे आप अपनी भावनाएं बताना चाहते हैं।
5. विरह की शायरी पढ़ते समय मन में जो उदासी आती है, उसे कैसे दूर करें?
शायरी पढ़ने से एक तरह का भावात्मक निकास (कैथार्सिस) होता है। यदि उदासी हावी होने लगे, तो कुछ समय के लिए ध्यान भटकाएं, किसी अच्छे दोस्त से बात करें या कोई ऐसा काम करें जिससे आपको सुकून मिलता हो।
भावनाओं का यह जो एक अथाह समंदर हमारे भीतर बहता है, उसे शब्दों के किनारे पर लाना कभी भी आसान नहीं होता। त्योहारों का यह मौसम, जो दुनिया के लिए रौनकों और हंसी-ठहाकों का प्रतीक है, एक टूटे हुए दिल के लिए किसी भारी सज़ा से कम नहीं होता। इस लेख में हमने उन अनकहे जज़्बातों, दर्द की उन गहरी खाइयों और विरह के उस सन्नाटे को आवाज़ देने की कोशिश की है, जो अक्सर लोग अपने भीतर ही दबा लेते हैं।
यदि इन पंक्तियों ने आपके दिल के किसी उस हिस्से को छुआ है जो लंबे समय से शांत था, या यदि आपको इनमें अपनी कोई अधूरी कहानी नज़र आई है, तो यह हमारा एक सार्थक प्रयास है। अपनी इस तन्हाई को कभी भी कमज़ोरी न समझें; यही वो जगह है जहाँ इंसान खुद से सबसे ज्यादा करीब होता है। अपने उन दोस्तों और करीबियों के साथ इस पेज को ज़रूर साझा करें जो शायद इसी तरह के किसी मौन दर्द से गुज़र रहे हों।
आप चाहें तो इस पृष्ठ को सेव भी कर सकते हैं, ताकि जब भी फागुन की हवाएं आपको रुलाने लगें, तो ये शब्द आपको अकेलेपन में एक साथी का अहसास करा सकें। ज़िंदगी कभी एक जगह नहीं ठहरती, उम्मीद है कि अगला मौसम आपके लिए कोई नया और सच्चा रंग लेकर आएगा।
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Bayjid एक हिंदी कंटेंट राइटर और शायर हैं। वे लव शायरी, रोमांटिक शायरी, सैड शायरी और जिंदगी से जुड़ी शायरी लिखते हैं। उनका उद्देश्य शब्दों के माध्यम से भावनाओं को खूबसूरती से व्यक्त करना है।